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Class 10 Hindi
Chapter 1

कबीर

कबीर की साखियों (साखी) में अहंकार त्यागकर मीठी वाणी बोलने, ईश्वर को अपने भीतर खोजने और निंदकों को हितैषी मानकर अपने स्वभाव को निर्मल बनाने का संदेश दिया गया है।

कबीर - साखी (सम्पूर्ण व्याख्या एवं शब्दार्थ)

कबीर - साखी (सम्पूर्ण व्याख्या एवं शब्दार्थ)
पाठ परिचय

साखी शब्द 'साक्षी' (गवाह) का रूप है। कबीर ने इसमें अहंकार त्यागने, मीठी वाणी और ईश्वर प्रेम की सीख दी है।

साखी 1

ऐसी बाँणी बोलिये, मन का आपा खोइ।
अपना तन सीतल करै, औरन कौ सुख होइ।।

प्रसंग कबीरदास जी ने अहंकार रहित मीठी बोली बोलने की बात कही है।

व्याख्या कबीर कहते हैं कि अहंकार त्यागकर ऐसी मीठी वाणी बोलें जिससे अपना मन शांत रहे और सुनने वाले को भी सुख मिले।

शब्दार्थ:
शब्दअर्थ
बाँणीबोली / वचन
आपाअहंकार (घमंड)
सीतलशीतल (ठंडा)
औरनदूसरों को

साखी 2

कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माहि।
ऐसें घटि-घटि राम है, दुनिया देखै नाहि।।

प्रसंग ईश्वर हमारे भीतर ही वास करते हैं, बाहर नहीं।

व्याख्या जैसे हिरण कस्तूरी की खुशबू को जंगल में ढूँढता है जबकि वह उसकी नाभि में होती है, वैसे ही ईश्वर हमारे दिल में हैं, पर हम उन्हें बाहर ढूँढते हैं।

शब्दार्थ:
शब्दअर्थ
कुंडलिनाभि
मृगहिरण
घटि-घटिकण-कण में

साखी 3

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहि।
सब अँधियारा मिटि गया, जब दीपक देख्या माहि।।

प्रसंग अहंकार और ईश्वर एक साथ नहीं रह सकते।

व्याख्या जब तक मुझमें 'मैं' (अहंकार) था, ईश्वर नहीं मिले। ज्ञान का दीपक जलते ही अहंकार का अँधेरा मिट गया और प्रभु मिल गए।

शब्दार्थ:
शब्दअर्थ
मैंअहंकार
हरिईश्वर
माहिअंदर / भीतर

साखी 4

सुखिया सब संसार है, खायै अरु सोवै।
दुखिया दास कबीर है, जागै अरु रोवै।।

व्याख्या दुनिया खाने-सोने में मस्त और सुखी है। कबीर दुखी हैं क्योंकि वे जाग रहे हैं (ज्ञानी हैं) और ईश्वर वियोग में रो रहे हैं।

शब्दअर्थ
सुखियासुखी
सोवैसोता है (अज्ञान)
रोवैरोता है

साखी 5

बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।
राम बियोगी ना जिवै, जिवै तो बौरा होइ।।

व्याख्या विरह रूपी साँप जब शरीर में बसता है तो कोई मंत्र काम नहीं करता। राम का वियोगी या तो मर जाता है या पागल हो जाता है।

शब्दअर्थ
बिरहवियोग
भुवंगमसाँप
बौरापागल

साखी 6

निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।
बिन सावण पाँणी बिना, निर्मल करै सुभाइ।।

व्याख्या निंदा करने वाले को पास रखना चाहिए। वह हमारी कमियाँ बताकर बिना साबुन-पानी के हमारे स्वभाव को साफ कर देता है।

शब्दअर्थ
निंदकबुराई करने वाला
नेड़ानिकट
आँगणिआँगन में

साखी 7

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोइ।
एकै आषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ।।

व्याख्या किताबें पढ़कर कोई ज्ञानी नहीं बनता। जो ईश्वर प्रेम का एक अक्षर पढ़ ले, वही असली पंडित है।

शब्दअर्थ
पोथीपुस्तकें
मुआमर गया
पीवप्रियतम (ईश्वर)

साखी 8

हम घर जाल्या आपणा, लिया मुराड़ा हाथि।
अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि।।

व्याख्या मैंने मोह-माया का घर जला दिया है। जो मेरे साथ भक्ति मार्ग पर चलेगा, उसे भी अपना घर जलाना होगा।

शब्दअर्थ
जाल्याजलाया
मुराड़ामशाल
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पाठ सार

इस वीडियो में कक्षा दसवीं हिन्दी के कोर्स B स्पर्श पाठ 1 'साखी' की सम्पूर्ण व्याख्या को सरल भाषा में समझाया गया है।

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Kabir ki Sakhi Question Answer

इस वीडियो में कक्षा दसवीं हिन्दी के कोर्स B स्पर्श पाठ 1 'कबीर की साखी' के प्रश्नों को करवाया गया है। इनके अलावा अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों का भी समावेश किया गया है।

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Kabir ki Sakhi MCQ Class 10 Hindi (Course B) Sparsh

इस वीडियो में कक्षा दसवीं हिन्दी के कोर्स B स्पर्श पाठ 1 'साखी' पाठ के 50 महत्वपूर्ण MCQs को करवाया गया है।

Textbook Questions
Q1: मीठी वाणी बोलने से औरों को सुख और अपने तन को शीतलता कैसे प्राप्त होती है?
Ans: मीठी वाणी मन के अहंकार को समाप्त करती है। जब हम अहंकार रहित होकर नम्रता से बोलते हैं, तो सुनने वाले को सुख और शांति मिलती है। साथ ही, हमारे मन में क्रोध या द्वेष नहीं रहता, जिससे हमारा अपना तन और मन भी शीतल (शांत) और स्वस्थ रहता है।
Q2: दीपक दिखाई देने पर अँधियारा कैसे मिट जाता है? साखी के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।
Ans: यहाँ 'दीपक' ज्ञान का और 'अँधियारा' अज्ञान का प्रतीक है। जिस प्रकार दीपक जलते ही अंधकार नष्ट हो जाता है, उसी प्रकार जब हृदय में ईश्वर-भक्ति और ज्ञान का प्रकाश फैलता है, तो अज्ञानता, भ्रम और अहंकार रूपी सारा अंधकार अपने आप मिट जाता है।
Q3: ईश्वर कण-कण में व्याप्त है, पर हम उसे क्यों नहीं देख पाते?
Ans: ईश्वर कण-कण में और हर प्राणी के हृदय में वैसे ही व्याप्त है, जैसे फूल में खुशबू या चकमक पत्थर में आग। परंतु, अज्ञानता और अहंकार (माया) के कारण हमारी बुद्धि पर पर्दा पड़ा होता है। हम उसे अपने भीतर खोजने के बजाय मंदिर-मस्जिद और तीर्थों में बाहर ढूँढते हैं, इसलिए उसे देख नहीं पाते।
Q4: संसार में सुखी व्यक्ति कौन है और दुखी कौन? यहाँ 'सोना' और 'जागना' किसके प्रतीक हैं?
Ans: संसार में वे लोग सुखी हैं जो केवल खाने और सोने (भौतिक सुखों) में व्यस्त हैं और ईश्वर के प्रति लापरवाह हैं। दुखी 'कबीर' हैं जो ईश्वर के वियोग में जाग रहे हैं। यहाँ 'सोना' अज्ञानता और मोह-माया में लिप्त होने का प्रतीक है, जबकि 'जागना' ज्ञान प्राप्ति और ईश्वर-प्रेम की तड़प का प्रतीक है।
Q5: अपने स्वभाव को निर्मल रखने के लिए कबीर ने क्या उपाय सुझाया है?
Ans: कबीर ने सुझाया है कि हमें अपनी निंदा (बुराई) करने वाले व्यक्ति को हमेशा अपने पास रखना चाहिए। निंदक जब हमारी कमियाँ बताता है, तो हम उन्हें सुधार सकते हैं। इस प्रकार बिना साबुन और पानी के ही हमारा स्वभाव निर्मल और पवित्र हो जाता है।
Q6: ‘ऐकै आषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ’ − इस पंक्ति द्वारा कवि क्या कहना चाहता है?
Ans: कवि का आशय है कि केवल पोथियाँ (मोटी किताबें) पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बनता। सच्चा ज्ञानी वही है जो परमात्मा के प्रेम (पीव) का एक अक्षर भी पढ़कर उसे जीवन में उतार ले। अर्थात, ईश्वर भक्ति और प्रेम ही सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है।
Q7: कबीर की उद्धृत साखियों की भाषा की विशेषता स्पष्ट कीजिए।
Ans: कबीर की भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है। इसमें राजस्थानी, पंजाबी, अवधी, ब्रज और तत्सम शब्दों का मिला-जुला प्रयोग है। यह भाषा जन-सामान्य की बोलचाल की भाषा है, इसलिए यह सीधी दिल पर असर करती है।
Q8: भाव स्पष्ट कीजिए: "बिरह भुवंगम तन बसै, मंत्र न लागै कोइ।"
Ans: भाव: जब किसी भक्त के मन में ईश्वर के विरह (जुदाई) रूपी साँप का वास हो जाता है, तो उस पर दुनिया का कोई भी मंत्र, दवा या उपाय असर नहीं करता। विरह की पीड़ा आंतरिक होती है, जिसे केवल ईश्वर मिलन से ही दूर किया जा सकता है।
Q9: भाव स्पष्ट कीजिए: "कस्तूरी कुंडलि बसै, मृग ढूँढै बन माँहि।"
Ans: भाव: जिस प्रकार कस्तूरी मृग की अपनी ही नाभि में होती है, पर वह अज्ञानतावश उसे जंगल में ढूँढता है; ठीक वैसे ही ईश्वर मनुष्य के हृदय में हैं, पर मनुष्य भ्रमवश उन्हें मंदिर-मस्जिद में बाहर खोजता है।
Q10: भाव स्पष्ट कीजिए: "जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाँहि।"
Ans: भाव: 'अहंकार' (मैं) और 'ईश्वर' (हरि) एक साथ नहीं रह सकते। जब तक अहंकार था, ईश्वर नहीं मिले। ज्ञान होने पर जब ईश्वर मिले, तो अहंकार स्वतः नष्ट हो गया।
Q11: भाव स्पष्ट कीजिए: "पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।"
Ans: भाव: केवल धार्मिक पुस्तकें पढ़ने से कोई ज्ञानी नहीं बनता। सच्चा पंडित वही है जिसने ईश्वर प्रेम के एक अक्षर को भी सच्चे मन से जान लिया हो।
Extra Questions
Q12: कबीर की साखी के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि "राम बियोगी" की दशा कैसी हो जाती है?
Ans: कबीर के अनुसार, जिसे राम (ईश्वर) के वियोग का रोग लग जाता है, उस पर कोई दवा या मंत्र असर नहीं करता। वह जीवित नहीं रह पाता, और यदि जीता भी है तो उसकी दशा पागलों (बौरा) जैसी हो जाती है क्योंकि उसे सांसारिक सुखों में कोई रुचि नहीं रहती।
1. कबीर की साखियों की भाषा कौन-सी है?
A अवधी
B ब्रज
C सधुक्कड़ी (पंचमेल खिचड़ी)
D खड़ी बोली
Correct: C
कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहा जाता है क्योंकि इसमें कई बोलियों का मिश्रण है।
2. "बाँणी" शब्द का क्या अर्थ है?
A बाण (तीर)
B बोली / वाणी
C बुनाई
D आदत
Correct: B
बाँणी का अर्थ वाणी या बोली है।
3. "आपा" खोने का क्या अर्थ है?
A अपनापन खोना
B होश खोना
C अहंकार (घमंड) त्यागना
D आत्मसम्मान खोना
Correct: C
साखी में 'आपा' का प्रयोग अहंकार (Ego) के लिए किया गया है।
4. "शीतल" का अर्थ साखी के संदर्भ में क्या है?
A ठंडा पानी
B शांत और सुखद
C बीमार
D धीमा
Correct: B
शीतल का अर्थ है मन की शांति और सुख।
5. कस्तूरी कहाँ बसती है?
A जंगल में
B मृग की नाभि (कुंडली) में
C फूलों में
D हवा में
Correct: B
कस्तूरी नर मृग की नाभि में पाई जाती है।
6. "घटि-घटि" का क्या आशय है?
A घड़े-घड़े में
B घटते क्रम में
C कण-कण में / हर हृदय में
D घाट-घाट पर
Correct: C
घटि-घटि का अर्थ है प्रत्येक स्थान पर या हर व्यक्ति के हृदय में।
7. "दीपक देख्या माहि" में "माहि" का क्या अर्थ है?
A महीने में
B धरती पर
C मेरे अंदर (भीतर)
D मछली
Correct: C
माहि का अर्थ यहाँ 'भीतर' या 'हृदय के अंदर' है।
8. "भुवंगम" शब्द का क्या अर्थ है?
A भवरा
B भुजंग (साँप)
C भवन
D भविष्य
Correct: B
भुवंगम का अर्थ भुजंग या साँप है, जो विरह के प्रतीक रूप में प्रयुक्त हुआ है।
9. "बौरा" का क्या अर्थ है?
A बहरा
B बुरा
C पागल
D बड़ा
Correct: C
बौरा का अर्थ है पागल या सुध-बुध खोने वाला।
10. "नेड़ा" का तत्सम रूप या अर्थ क्या है?
A नया
B निकट (पास)
C नीचे
D निडर
Correct: B
नेड़ा एक देशज शब्द है जिसका अर्थ 'निकट' होता है।
11. "आँगणि" शब्द का क्या अर्थ है?
A आग
B आँगन में
C आगे
D आँख
Correct: B
आँगणि का अर्थ घर के आँगन से है।
12. "मुआ" शब्द का क्या अर्थ है?
A मरा हुआ / मर गया
B मुँह
C मूर्ख
D मुक्त
Correct: A
साखी में 'जग मुआ' का अर्थ है 'जग मर गया' या संसार समाप्त हो गया।
13. "पीव" का क्या अर्थ है?
A पीना
B पिता
C प्रियतम (ईश्वर)
D पवित्र
Correct: C
पीव का अर्थ प्रियतम है, यहाँ यह परमात्मा के लिए प्रयुक्त हुआ है।
14. "जाल्या" का क्या अर्थ है?
A जाल
B जलाया
C जाला
D जाना
Correct: B
जाल्या मतलब जला दिया (अहंकार रूपी घर को)।
15. "मुराड़ा" किसे कहते हैं?
A मरा हुआ
B मुड़ा हुआ
C जलती हुई लकड़ी (मशाल)
D मुंडेर
Correct: C
मुराड़ा का अर्थ जलती हुई लकड़ी या ज्ञान की मशाल है।
16. कबीर के अनुसार मीठी वाणी बोलने से क्या होता है?
A शत्रु बढ़ जाते हैं
B अपना अहंकार बढ़ता है
C औरों को सुख और अपने तन को शीतलता मिलती है
D पैसा मिलता है
Correct: C
मीठी वाणी वक्ता और श्रोता दोनों को सुख देती है।
17. कस्तूरी मृग जंगल में क्या ढूँढता है?
A पानी
B अपने साथी को
C कस्तूरी की सुगंध को
D शिकारी को
Correct: C
वह उस सुगंध के स्रोत को बाहर ढूँढता है जो वास्तव में उसी के पास है।
18. कबीर ने "राम" को कहाँ बताया है?
A अयोध्या में
B मंदिर में
C काशी में
D घटि-घटि (कण-कण) में
Correct: D
कबीर निर्गुण भक्ति के उपासक थे, उनके राम कण-कण में व्याप्त हैं।
19. कबीर के अनुसार संसार के लोग "सुखी" क्यों हैं?
A क्योंकि उनके पास बहुत पैसा है
B क्योंकि वे खाते हैं और सोते हैं (अज्ञानी हैं)
C क्योंकि वे ज्ञानी हैं
D क्योंकि वे स्वस्थ हैं
Correct: B
कबीर ने सांसारिक भोग-विलास में लिप्त अज्ञानी लोगों को व्यंग्य में 'सुखी' कहा है।
20. कबीर स्वयं को "दुखी" क्यों मानते हैं?
A क्योंकि वे गरीब हैं
B क्योंकि वे बीमार हैं
C क्योंकि वे प्रभु विरह में जाग रहे हैं और संसार की नश्वरता को जानते हैं
D क्योंकि लोग उनकी निंदा करते हैं
Correct: C
ज्ञानी होने के कारण वे ईश्वर वियोग और संसार की दशा देखकर दुखी हैं।
21. "बिरह भुवंगम तन बसै" - इसमें विरह को क्या कहा गया है?
A मित्र
B साँप
C दवा
D ईश्वर
Correct: B
विरह की तुलना साँप से की गई है जो शरीर को डसता रहता है।
22. राम के वियोगी की दशा कैसी होती है?
A वह बहुत खुश रहता है
B वह मर जाता है या पागल (बौरा) हो जाता है
C वह सन्यासी बन जाता है
D वह अमीर बन जाता है
Correct: B
ईश्वर के बिना भक्त का जीवन असंभव है, वह जीते जी मृत समान या पागल हो जाता है।
23. निंदक हमारे स्वभाव को कैसे निर्मल करता है?
A साबुन लगाकर
B हमारी तारीफ करके
C हमारी कमियाँ (दोष) बताकर
D हमें पैसा देकर
Correct: C
निंदक हमारी कमियाँ उजागर करता है जिससे हम उन्हें सुधार सकते हैं।
24. कबीर ने निंदक को कहाँ बसाने की सलाह दी है?
A गाँव के बाहर
B आँगन में (अपने पास)
C जंगल में
D पड़ोसी के घर
Correct: B
कबीर कहते हैं 'निंदक नेड़ा राखिये' (पास रखिए)।
25. मोटी पोथियाँ (किताबें) पढ़कर भी लोग क्या नहीं बन पाए?
A अमीर
B राजा
C पंडित (ज्ञानी)
D लेखक
Correct: C
किताबी ज्ञान से कोई सच्चा पंडित नहीं बनता।
26. पंडित बनने के लिए क्या पढ़ना आवश्यक है?
A पूरी रामायण
B व्याकरण
C 'पीव' (प्रेम) का एक अक्षर
D चारों वेद
Correct: C
ढाई आखर प्रेम का (ईश्वर प्रेम) पढ़ने वाला ही सच्चा ज्ञानी है।
27. कबीर ने अपना घर क्यों जलाया?
A गुस्से में
B ईश्वर प्राप्ति और ज्ञान के लिए (मोह त्यागने हेतु)
C ठंड लगने पर
D गलती से
Correct: B
घर जलाना यहाँ मोह-माया के त्याग का प्रतीक है।
28. "अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि" - इसका क्या आशय है?
A मैं दूसरों के घर में आग लगा दूँगा
B मैं साथियों को भी मोह-माया त्यागने की प्रेरणा दूँगा
C मैं सबको बेघर कर दूँगा
D मैं सबका समान जला दूँगा
Correct: B
कबीर कहते हैं कि जो मेरे मार्ग पर चलेगा, उसे भी मेरी तरह सांसारिक मोह त्यागना होगा।
29. "बिरह भुवंगम" में कौन सा अलंकार है?
A उपमा
B रूपक
C अनुप्रास
D श्लेष
Correct: B
विरह रूपी साँप (रूपक अलंकार)। (नोट: 'ब' वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास भी है, पर रूपक प्रधान है। परीक्षा में रूपक सही माना जाता है)।
30. "घटि-घटि" में कौन सा अलंकार है?
A यमक
B पुनरुक्ति प्रकाश
C श्लेष
D उपमा
Correct: B
एक ही शब्द की आवृत्ति और समान अर्थ होने के कारण पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
31. "ऐसी बाँणी बोलिये" में कौन सा अलंकार है?
A अनुप्रास
B यमक
C रूपक
D उत्प्रेक्षा
Correct: A
'ब' वर्ण की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।
32. "दीपक देख्या माहि" में दीपक किसका प्रतीक है?
A मिट्टी के दीये का
B सूर्य का
C ज्ञान का
D बिजली का
Correct: C
दीपक यहाँ ज्ञान (Knowledge) का प्रतीक है।
33. साखी (Sakhi) शब्द किसका तद्भव रूप है?
A सखी
B साक्षी
C सखा
D शिक्षा
Correct: B
साखी शब्द संस्कृत के 'साक्षी' (Witness/Gawah) शब्द से बना है।
34. इन साखियों में कौन सा छंद (Chhand) प्रयुक्त हुआ है?
A चौपाई
B दोहा
C सोरठा
D सवैया
Correct: B
कबीर की ये साखियाँ 'दोहा' छंद में रचित हैं।
35. "सुखिया सब संसार है" में कौन सा अलंकार है?
A अनुप्रास
B रूपक
C उपमा
D मानवीकरण
Correct: A
'स' वर्ण की आवृत्ति (सुखिया, सब, संसार) के कारण अनुप्रास अलंकार है।
36. कबीर किस भक्ति धारा के कवि हैं?
A सगुण भक्ति
B निर्गुण भक्ति (ज्ञानाश्रयी शाखा)
C सूफी काव्य
D कृष्ण भक्ति
Correct: B
कबीर निर्गुण भक्ति धारा की ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं।
37. "कस्तूरी कुंडलि बसै" में निहित व्यंग्य क्या है?
A मृग मूर्ख है
B मनुष्य की अज्ञानता पर व्यंग्य
C जंगल बहुत बड़ा है
D सुगंध बहुत तेज है
Correct: B
यह मनुष्य की अज्ञानता पर व्यंग्य है जो सुख और ईश्वर को बाहर खोजता है।
38. "बिन सावण पाँणी बिना" में कौन सा भाव है?
A बिना खर्च के काम होना
B चमत्कार
C सहजता और स्वाभाविकता
D कठिन कार्य
Correct: C
बिना बाहरी साधनों के आंतरिक शुद्धि की बात की गई है।
39. "एकै आषिर पीव का" में 'आषिर' का तत्सम रूप क्या है?
A आखिर
B अक्षर
C अश्रु
D अक्षय
Correct: B
आषिर का तत्सम शब्द 'अक्षर' है।
40. "तास का" शब्द का अर्थ है?
A ताश के पत्ते
B उसका
C तेज
D ताजा
Correct: B
तास का (Tas ka) का अर्थ है 'उसका'।
41. इन साखियों का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A मनोरंजन करना
B कहानी सुनाना
C नैतिक शिक्षा और व्यवहारिक ज्ञान देना
D इतिहास बताना
Correct: C
साखियों का उद्देश्य जीवन जीने की कला और नैतिकता सिखाना है।
42. "साधु" की क्या पहचान बताई गई है (कबीर के अनुसार अन्य दोहों में)?
A जाति
B ज्ञान
C वेशभूषा
D माला
Correct: B
साधु की पहचान उसके ज्ञान से होती है (जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान)।
43. कबीर के 'राम' और तुलसीदास के 'राम' में क्या अंतर है?
A दोनों एक हैं
B कबीर के राम निर्गुण-निराकार हैं, तुलसी के राम दशरथ पुत्र हैं
C कबीर के राम राजा हैं
D कोई अंतर नहीं
Correct: B
कबीर के राम अजन्मे और निराकार ब्रह्म हैं।
44. "मन का आपा खोइ" का क्या परिणाम होता है?
A व्यक्ति कमजोर हो जाता है
B तन और मन शीतल (शांत) हो जाता है
C धन की हानि होती है
D नींद नहीं आती
Correct: B
अहंकार खोने से परम शांति मिलती है।
45. कबीर के अनुसार कौन सा व्यक्ति "पंडित" नहीं बन सकता?
A जो स्कूल नहीं जाता
B जो पोथी पढ़ता है पर प्रेम नहीं जानता
C जो संस्कृत नहीं जानता
D जो गरीब है
Correct: B
केवल पोथी पढ़ने वाला पंडित नहीं, प्रेम जानने वाला ही पंडित है।
46. "मंत्र न लागै कोइ" का क्या कारण है?
A दवा खराब है
B रोग शारीरिक नहीं, मानसिक/भावनात्मक (विरह) है
C डॉक्टर अच्छा नहीं है
D जादू-टोना हुआ है
Correct: B
ईश्वर विरह का रोग आत्मा का रोग है, जिस पर भौतिक दवाएं काम नहीं करतीं।
47. "हम घर जाल्या आपणा" में कबीर ने क्या हाथ में लिया है?
A तलवार
B मुराड़ा (मशाल)
C पानी
D किताब
Correct: B
उन्होंने ज्ञान की जलती हुई मशाल (मुराड़ा) हाथ में ली है।
48. कबीर की साखियों में "मृग" किसका प्रतीक है?
A जानवर का
B भटकते हुए मनुष्य के मन (जीवात्मा) का
C प्रकृति का
D सुंदरता का
Correct: B
मृग उस जीवात्मा का प्रतीक है जो आनंद (कस्तूरी) को बाहर खोज रही है।
49. कबीर के अनुसार सच्चा "सुख" क्या है?
A सोना और खाना
B ईश्वर की भक्ति और ज्ञान
C धन-दौलत
D मित्रों का साथ
Correct: B
कबीर की नज़र में दुनिया का सुख (खाना-सोना) वास्तव में दुख है, सच्चा सुख प्रभु मिलन में है।
50. "औरन कौ सुख होइ" से कबीर का क्या तात्पर्य है?
A दूसरों को पैसा देना
B दूसरों को हँसाना
C दूसरों को अपनी वाणी से कष्ट न पहुँचाना
D दूसरों के घर जाना
Correct: C
ऐसी वाणी बोलना जिससे सुनने वाले को शांति मिले, कष्ट नहीं।
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CBSE 2019
Q1: कस्तूरी मृग के माध्यम से कबीर ने मनुष्यों को क्या संदेश दिया है?
Ans: कबीर ने कस्तूरी मृग के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जिस तरह मृग अपनी ही नाभि की सुगंध को जंगल में ढूँढता फिरता है, उसी तरह मनुष्य भी ईश्वर को अपने हृदय में न झाँककर बाहरी आडंबरों और तीर्थों में खोजता है। हमें ईश्वर को अपने भीतर खोजना चाहिए।
CBSE 2020
Q2: "साखी" शब्द का क्या अर्थ है? कबीर की साखियाँ हमें क्या शिक्षा देती हैं?
Ans: "साखी" शब्द 'साक्षी' (गवाह) का तद्भव रूप है। ये साखियाँ सत्य की गवाह हैं। ये हमें नैतिक जीवन जीने, अहंकार त्यागने, गुरु का सम्मान करने, मीठी वाणी बोलने और ईश्वर से सच्चा प्रेम करने की शिक्षा देती हैं।
CBSE 2018
Q3: कबीर ने 'घर' जलाने की बात क्यों कही है? 'हम घर जाल्या आपणा...' साखी के आधार पर बताइए।
Ans: यहाँ 'घर' का अर्थ सांसारिक मोह-माया, वासनाएं और अहंकार है। कबीर कहते हैं कि ईश्वर को पाने के लिए इन विकार रूपी घर को जलाना (त्यागना) पड़ता है। जो व्यक्ति कबीर के साथ भक्ति की राह पर चलेगा, उसे भी अपना यह 'मोह का घर' जलाना होगा।
CBSE 2016
Q4: "निंदक नेड़ा राखिए" साखी में 'आँगणि कुटी बँधाइ' का लाक्षणिक अर्थ क्या है?
Ans: इसका लाक्षणिक अर्थ है—निंदक को अत्यधिक समीप रखना। जैसे हम आँगन में कुटिया बनाकर किसी को अपने घर का हिस्सा बना लेते हैं, वैसे ही निंदक को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेना चाहिए ताकि हम निरंतर आत्म-सुधार कर सकें।
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